करन्सी के चक्रवात में बाजारों की तूफानी चाल
पिछले पन्द्रह सप्ताहों में युएस डोलर इन्देक्ष में भरी उठा-पठक देखि गई है। फरवरी माह के तीसरे सप्ताह से डोलर इन्देक्ष ८० के स्तर को पार कर फिरसे नई उंचाईआ छूने लगा था। किन्तु मई महीने में डोलर इन्देक्ष में ८० से ८४ के बिच में बड़ी उतार-चढ़ाव देखने मिलि. पिछले पन्द्रह सप्ताहों में डोलर इन्देक्ष में ८० से ८४, ८४ से फिर ८१, ८१ से फिर ८४ और फिर पिछले सप्ताह ८० तक की घट - मनो जैसे इन्देक्ष स्नेक-लेडर चाल दिखा रहा हो। डोलर इन्देक्ष जब इस तरह की जिग-जेग चाल बना रहा था तब रूपया डोलर के अतिरिक्त यूरो, पाउंड और येन जैसी तमाम वैश्विक करन्सी के सामने गिरावट की चाल बनाये हुए था। वैसे तो दो साल पहेले अक्तूबर २०११ में USDINR में ४८ के स्तर पर विकली चार्ट पे ५०,१०० और २०० सप्ताह (जी हां सप्ताह, दिन नही) की एक्ष्पोनेन्शीयल एवरेज में एक तेजी तरफी ब्रेक-आउट का निर्माण हुआ था। USDINR के दो साल पहेले के इस तेजी तरफी ब्रेक-आउट के चलते डोलर रूपये के सामने लगातार दो साल तक बढ़ता रहा है। फिलहाल हमने जो यह ६० से ७० तक की तूफानी चाल देखि, वः तो इस ब्रेक-आउट का आखरी दौर था। "कोई भी स्टोक, कमोडिटी, इन्देक्ष या करंसी का कोई एक ट्रेंड जब समाचार पत्रों की हेड-लाइन बनता है, तब वह ट्रेंड का आखरी दौर होता है", ऐसा मास-सायकोलोजी में कहा जाता है। रुपये की जो गिरावट हमने पिछले तिन महीनों में देखि है, वह इस नियम से अगर तौले तो यह कहा जा सकता है की अब रूपये में सुधार की आश ज्यादा है। दूसरी और जिस तरह से डोलर इन्देक्ष ने ८० का स्तर तोडा है, वह देखते फ़िलहाल तो एमर्जिंग मार्केट्स में सुधार कुछ दिनों तक और टिका रह सकता है। घटते डोलर से एमर्जिंग मार्किट में क्या बदलाव आते है उस पर हम फिर कभी विस्तार से चर्चा करेंगे। फिलहाल तो डोलर के इस कड़ाके में लगातार चार महीने टूट रहे इंडोनेशियन रूपये ने पहली बार साप्ताहिक सुधार दिखाया, ब्रजील के रियल में चौथे सप्ताह भी सुधार देखा गया, रशिया का रूबल लगातार तीसरे सप्ताह सुधरा और सिंगापोर का डोलर भी लगातार चौथे सप्ताह पोजिटिव बांध रहा। वैसे अगर देखने जाए तो डोलर इन्देक्ष में तकरीबन ३९ प्रतिशत वेटेज सिर्फ यूरो की है। पिछले सप्ताह यूरो ने डोलर के सामने १.३३५० से १.३५६५ तक की बढौती दिखाई है। अब देखना यह है की डोलर के सामने एमर्जिंग मार्केट्स और यूरोपियन देशो की करंसी कहा तक सुधार दिखा पाती है। ग्लोबल मार्केट के इन नए समीकरणों में अब येन की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण रहेगी। अक्तूबर २०१२ में पाँच साल बाद फिर से USDJPY में येन-केरी ट्रेड का निर्माण हुआ है। USDJPY में ७८ से १०३ तक की तूफानी चाल के बाद पिछले मई माह में एक करेक्शन देखि गई। फिलहाल विकली चार्ट पर येन एक ट्रएंगल पेटर्न में है। ९८.५० से १०१.५० की रेंज की इस पेटर्न का ब्रेक-आउट अब ग्लोबल मार्केट में काफी निर्णायक रहनेवाला है।
सोना-चांदी: ठीक दो साल पहेले सितम्बर २०११ की ६ तारीख को युएस स्पॉट सोने में १९२० डोलर का सर्वोच्च स्तर देखने मिला था। इन दो सालो में सोना ग्लोबल मार्केट में लगातार घटता रहा है। भारतीय बाजार में सोने के भाव में जो उछाल देखे गए है, वह रूपये की गिरावट के चलते थे। ग्लोबल मार्केट में सोने में १९२० डोलर से शुरू हुइ गिरावट में पिछले जून मास में ११८० तक का निचा स्तर देखने मिला। किन्तु जून मास से शुरू हुई तेजी की चाल में सोने में वापस १४०० डोलर के उपर के भाव देखे गए। किन्तु पिछले चार सप्ताहों से सोना १४०० डोलर के उपर बंद रहेने में सफल नही हुआ है। अब इस सप्ताह सोने में १२७० डोलर महत्वपूर्ण सपोर्ट है। इस सप्ताह के शुरूआती दिनों में अगर बिकवाली के दौरान सोना यह सपोर्ट बनाये रखता है तो वापस १४०० डोलर की गुंजाईश है। किन्तु भारतीय बाजार में रूपया अगर सुधरता रहा तो सोने की वह संभवित तेजी यहाँ धीमी रह सकती है। सप्ताह के शुरूआती दिनों में अगर एमसीएक्स वायदा में २८६०० के आसपास तक की गिरावट अगर देखि जाए तो वहा छोटे स्टॉपलोस से तेजी की पोज़ीशन बना सकते है। चांदी में भी सोने की तरह शुरूआती गिरावट में ४५६०० के सपोर्ट को ध्यान में रख सकते है।
शेर बाजार: पिछले सप्ताह शेर बाजार में एक दिन सातसौ पॉइंट की तेजी तो दुसरे दिन पांचसो पॉइंट की गिरावट देखने मिली। अभी पिछले महीने की २८ तारीख को ही निफ्टी स्पॉट में ५११९ का निचा स्तर देखा गया था। एक महीने से भी कम समय में निफ्टी में १००० पॉइंट की रैली देखि गई है। निफ्टी और बेंक-निफ्टी में इस महीने में काफी बार गेप-अप ओपनिंग्स देखे गए है। इसलिए इन दोनों इन्देक्ष में करेक्शन की संभावना जरुर है। किन्तु जिस तरह से इन इन्देक्ष में खरीदारी देखि गई है, और इस सप्ताह की डेरिवेटिव एक्सपायरी को ध्यान में रखते हुए, यह कहा जा सकता है की निफ्टी में अभी भी यह ट्रेंड कुछ दिन और बना रहे। रिलायंस, भारती, और्बिन्दो फार्मा, रिलायंस केपिटल और रिलायंस इन्फ्रा में इस सप्ताह तेजी का रुख देखा जा सकता है।
क्रूड ओइल : USDINR में अक्तूबर २०११ में विकली चार्ट पर जिस तरह का ब्रेक-आउट देखा गया था, ठीक वैसा ब्रेक-आउट युएस क्रूड के विकली चार्ट पर पिछले जून मास में देखा गया है। जून मास के आखरी सप्ताह में क्रूड ने जिस तरह १०० डोलर के उसके मुख्य अवरोध को पार किया है, वह देखते क्रूड अब एक-डेढ़ साल की पोजिटिव ट्रेंड की और है। इसका मतलब यह नही की अब क्रूड ओइल में सीधी - सीधी तेजी देखि जाएगी। यह तो तेजी के ट्रेंड की सिर्फ शुरुआत है। दूसरी और पिछले तिन महीनों में लगातार गिरते रूपये की वजह से हमारे बाजारों में क्रूड में ७७०० के उपर के भाव पिछले महीने ही देखे गए है। फ़िलहाल तो एमसीएक्स वायदा में क्रूड तिन सप्ताहों में ६२०० तक की गिरावट दिखा सकता है।