एक ओर यूएस डॉलर इंडेक्स ८० के स्तर को तोड़, २०० सप्ताहों की एक्सपोनेंशियल एवरेज के निचे उतर आया है, वही अचानक रूपये में भी पिछले पांच सप्ताहों से लगातार सुधार देखि गई है . यूएस में "फ़ोर्स शट-डाउन" के बाद अब फिरसे वही डेट सीलिंग की चर्चा जोर पकड़ेगी. किन्तु हमे यह नही भूलना चाहिए की डॉलर इंडेक्स के सबसे बड़े घटक यूरो में उच्च स्तरों पर अवरोध देखि जा रही है. अर्थात, इस सप्ताह की शुरुआत में डॉलर इंडेक्स में गिरावट भले ही देखि जाए, किन्तु सप्ताह के भीतर या आखरी दिनों में बाउंस-बेक अपेक्षित जरुर है.
अब अगर डॉलर इंडेक्स में बाउंस-बेक अपेक्षित हो, तो इसका मतलब तो यही हुआ की रूपये में फिर से गिरावट देखि जाए. किन्तु, धारणा के विपरीत, रुपया आनेवाले सप्ताह में सुखद आश्चर्य देने की मानो पूरी तैयारी कर रहा है.
जैसा की हम उपर USDINR के विकली चार्ट पर देख सखते है, डॉलर ने रूपये के सामने माह अक्तूबर २०११ में महत्वपूर्ण एवरेज पर ब्रेक-आउट दिखाया था. रूपये की हाल में देखि गई भारी गिरावट तो इस ट्रेंड का आखरी दौर था. गुजरात के न्यूज पेपर में छपे मेरे पिछले चार महीनों के हर आर्टिकल में मेने यह दोहराया है. (यहाँ मेरे मित्रो को यह जरुर याद दिलाऊंगा की ठीक ऐसा ही ब्रेक-आउट फिलहाल यूएस क्रूड में बना है. ऐसे ब्रेक-आउट के नतीजे फौरन नही दीखते. किन्तु, बारह-अठारह महीने बाद उनकी गहराई नजर आती है.)
अब लगातार पांच सप्ताह सुधरने के बाद भले ही रूपये में सुधार की गुंजाईश लोग कम आंक रहे हो. किन्तु, इस सप्ताह ६०.५० और वः टूटने के बाद रूपये में ५९.६० तक के स्तर देखे जा सकते है. सुनने में भले ही यह पेचीदा लगे की "डॉलर इंडेक्स या दुसरे शब्दों में डॉलर के सुधरने की सम्भावना है, किन्तु रुपया इसके बावजूद डॉलर के सामने सुधार दिखा सकता है." सिर्फ डॉलर ही नही, यूरो के सामने भी इस सप्ताह में रुपया ऐसा ही आश्चर्य दिखा सकता है.
शीतलपूरी गोस्वामी


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