२००८ के बुलडोजर रन के बाद चौपट हुए शेरबाजार में ठीक ३ साल बाद किरसे नया स्तर देखा गया था. किन्तु वः ख़ुशी छ्लावनी साबित हुई. २०११ के जनवरी महीने से बाजार में दो साल तक मंदी की मार चलती रही. इन दो सालो में इंडेक्स को ज्यादा धक्के नही पहुचे. अगर निफ्टी की बात करे तो ज्यादातर निफ्टी ५००० के उपर टिकी रही. किन्तु पिछली तेजी में स्थानीय निवेशको ने जिन शेरो में भरपूर पैसे लगाए थे उनका बुरा हाल हुआ है. सन फार्म, ल्यूपिन, एशियन पेंट्स, एचसीएल टेक, आईटीसी, टीसीएस, महिंद्रा & महिंद्रा, टाटा मोटर जैसे कुछ चुन्न्दा शेरो के बलबूते पर निफ्टी ज्यादातर टिकी रही. जबकि जिंदल स्टील, रिलायंस केपिटल, रिलायंस इन्फ्रा, रिलायंस पावर, डीएलऍफ़, यूनिटेक, टाटा स्टील, रिलायंस, हिंडाल्को जैसे शेर जिनमे रिटेल इन्वेस्टर्स ने भरपूर पैसे लगाए थे, उनमे १० से लेकर ९० प्रतिशत तक की गिरावट रही.
अब जब की २००८ में शुरू हुई मंदी को छ साल और २०११ की ६३०० की ऊंचाई को तिन साल होने को है, रुपया भारी मार जेलकर अब जब उभर रहा है, तो यह आस फिरसे बंधी है की इस बार नया इंडेक्स जरुर देखने मिलेगा?
इस सवाल का जवाब ढूंढने अगर निफ्टी की विकली चार्ट को देखे तो -
- विकली चार्ट पर कप एण्ड हेंडल पेटर्न का निर्माण हुआ है. इस पेटर्न में अवरोध का स्तर, जो इस किस्से में ६२०० के आसपास है, के उपर का बंध नई तेजी या मंदी लाता है.
- किन्तु, MACD जो की अगले महीने की गिरावट के बाद हिस्टोग्राफ में नेगेटिव टेरिटरी में आ चूका है, पिछले महीने की १००० पॉइंट की रेली के बावजूद अभी भी सिर्फ ब्रेक-आउट की कदार पे है.
- अल्टीमेट ओसिलेटर जो की अब ७० को छूने की तैयारी में है, यह जता रहा है की अब तकरीबन चार-पांच सप्ताह में हाल की तेजी टॉप-आउट हो सकती है.
एक्स्पोनेंसीयल एवरेज और कप एण्ड हेंडल पेटर्न देखते हुए, कुलमिलाकर अब निफ्टी स्पॉट में जबतक ५७८० बरकरार रहता है, निफ्टी एक बड़ी तूफानी चाल की ओर है. हां, ६२०० पर यहा काफी उथलपाथल देखने मिलेगी.
यहाँ पर फिरसे दोहराना चाहूँगा की निफ्टी में किसी भी तरह की तूफानी तेजी के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है ५७८० का बरकरार रहना.
शीतलपूरी गोस्वामी

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